What is barcode in Hindi

What is Barcode

किसी भी बस्तु के उत्पादक तिथि, मूल्य, उत्पादक देश तथा इस्थिति को एक काली तथा उजली लाइन के समूह में संगृहीत सुचना को Barcode कहते है | जिसको एक बिसेस Barcode पढने वाले यंत्र से उस बस्तु को Barcode के माध्यम से उसकी उत्पादक तिथि, मूल्य, उत्पादक देश तथा इस्थिति को आसानी से पहचाना जाता है |

इसके दो प्रकार होते है पहला लिनिअर बारकोड तथा दूसरा टूडी बारकोड |
जो यूरोपियन आर्टिकल नंबर (EAN) 13 तथा यूनिवर्सल प्रोडक्ट कोड (UPC) 12 नंबर के तहत बारकोड का निर्माण होता है |

सामन्तः Barcode दो प्रकार के होते है |

लिनिअर Barcode- यह दो पार्ट्स से बना होता है (UPC) 12 नंबर में से पहला 6 नंबर बस्तु के उत्पादन करता के सुचना देता है तथा अगला 5 नंबर बस्तु का नंबर तथा लास्ट नंबर स्कैन करने के बाद बारकोड सत्यापित करता है | मतलब बारकोड सही से स्कैन हुवा है की नही और यह सही है की नही | इत्यादि

टूडी Barcode- इस बार कोड में लिनिअर बारकोड के तुलना में ज्यादा जानकारी होती है तथा इसे स्कैन करके प्राप्त किया जाता है इस तरह के बारकोड फ़ोन, एयरलाइंस टिकट, पेमेंट बैंक इत्यादि में ज्यादा होता है |

बारकोड का इस्तेमाल हमारे दैनिक जीवन में होने वाले खाद्य, वस्त्र, दवाई तथा बिजली के उपकरण आदि के लिए ज्यादा इस्तेमाल होते है | जो आपको सुपर बाजार में जायदा तर देखने को मिलते है |

बारकोड का इस्तेमाल इसलिए होता है की बस्तु का मूल्य तथा संख्या कम समय में बारकोड पढने वाले यंत्र से कंप्यूटर के माध्यम से बताया जा सकता है जिससे की समय की बचत तथा गड़ना में आसानी होती है |

अब इसका इस्तेमाल स्वचालित और डिजिटल लेनदेन में ज्यादा उपयोग होने लगा है |

क्या यह एक जैसे होते है | (All barcode have same)
सामान्य तौर पर जब हम बारकोड को देखते है तो सारे एक जैसे ही दीखते है परन्तु इसमें अंतर होता है वास्तव में इसमें 95 लाइन होते है उसी तरह इसमें 95 कोलम भी होते है जब एक ही कलर के कोलम एक साथ देखते है तो मोटी और पतली लाइन दिखती है जो काली और उजली होती है |  

अभी के समय में टेकनोलोजी का योगदान है समाज को आगे बढ़ाना उसका ही एक परिणाम है बारकोड का अविष्कार नार्मन जोसफ वुडलैंड जो बैचलर ऑफ़ साइंस इन मकेनिकल की डिग्री अमेरिका के पेंसिलवेनिया के एक ड्रेक्सेल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से प्राप्त किया तथा उसी में वो लेक्चरार भी थे | तथा उनका दोस्त बर्नाड सिल्वर बैचलर ऑफ़ इलेक्ट्रिकल इंजिनियर जो उसी ड्रेक्सेल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से पढ़े हुए थे |  
बर्नाड सिल्वर के कहने पर जोसफ वुडलैंड ने इस्पे काम करना जारी रखा ताकि बस्तु की जानकारी कोड के द्वारा आसानी से प्राप्त किया जा सके | उन्होंने पहला परावैग्नी स्याही से कोड बनाया परन्तु कुछ ही समय में वह स्याही मिटने लगी और उसकी लागत भी ज्यादा थी |
उन्होंने बारकोड पर काम करना जारी रखा और जोसफ वुडलैंड लेक्चरार की नौकरी छोड करके बारकोड के अबिस्कार में लग गए उनके दिमाग में मोर्स कोड डाट्स और डैश जिसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक रूप से जानकारी भेजने के लिए किया जाता है। उसी के आधार पर एक दिन समुद्र के किनारे रेत पर बैठे हुवे उन्होंने अपनी ऊँगली से लाइन बनाई उनको अंदाजा हो गया की मोर्स कोड में से डाट्स और डैश को हटाकर मोटी और पतली लाइन बना करके कोड का निर्माण किया जा सकता है |
    

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